Stories In Hindi | कर्म का फल – हिन्दी कहानी | Moral Stories

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                                 कर्म का फल – हिन्दी कहानी

एक गाँव मे एक दो भाई रहते थे। एक का नाम धर्मराज और दूसरे का नाम कर्मराज था। नाम के हिसाब से ही दोनों का स्वभाव भी था। धर्मराज धार्मिक था और कर्मराज मेहनती था। पिता के देहान्त के बाद दोनो भाइयों ने खेत में काम करना शुरू किया। दोनो ही अपने हिसाब से काम करते थे। धर्मराज अपना अधिकत्तर समय भगवान की पूजा किया करता था, जिससे अच्छी फसल हों वहीं कर्मराज खेत में मेंहनत किया करता था। तीन महीनों के बाद अच्छी फसल हुय़ी। दोनों ने फसल बाजार में बेच दी और अच्छा पैसा कमाया। (Stories In Hindi)

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दोनों घर आयें। कर्मराज ने अपना ज्यादा हिस्सा माँगा क्योंकि उसने ज्यादा मेंहनत की थी, लेकिन धर्मराज का कहना था कि अगर वह भगवान से प्रार्थना ना करता तो इतनी फसल ना होती। दोनो झगड़े को सुलझाने के लिए सरपंच के पास गयें। दोनों ने सारा किस्सा सुनाया।

सरपंच ने दोनों को एक एक बोरा चावल दिया जिसमें कंकड़ भरे हुए थे और सुबह तक साफ करके लाने को कहा। कर्मराज ने रात भर मेहनत की वही धर्मराज ने बोरी भगवान के सामने जाकर रख दी और प्रार्थना करनी शुरू कर दी।

दोनों सुबह अपनी अपनी बोरी लेकर सरपंच के पास गयें। सरपंच ने दोनों की बोरी का निरछण किया। धर्मराज को पूरा भरोसा था कि भगवान ने उसका काम अवश्य कर दिया होगा पर निरछण पे उसकी वोरी वैसी की वैसी ही मिली और कर्मराज की बोरी पूरी साफ थी। सरपंच ने कर्मराज को ज्यादा हिस्सी दिया। अब कर्मराज को समझ में आ गया थी कि भगवान भी उनकी मद्द करता हैं जो अपनी मद्द खुद करता हैं। (Stories In Hindi)

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